अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 21 फरवरी 2017

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस
21 फरवरी 2017

    भाषाएँ केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, सांस्कृतिक गौरव की भी वाहक होती हैं। विभिन्न भाषाओं का ज्ञान हमारी अभिव्यक्ति को अधिक प्रभावशाली बनाता है। खासकर लोकभाषाओं के पास मुहावरों व लोकोक्तियों का असीम भण्डार है जो उनके कथन को सशक्त बनाता है। लोकभाषाओं की शब्द सामथ्र्य का अनुमान इससे ही लगाया जा सकता है कि राजस्थानी भाषा में ऊँट के लिए ही चार सौ से अधिक पर्यायवाची हैं, तो विक्रमी कलेण्डर के हर महीने मंे बरसने वाले बादलों के लिए एक अलग नाम है पर अत्यन्त खेद का विषय है कि दुनिया में इस समय प्रचलन में मौजूद करीब सात हजार भाषाओं मंे से आधी भाषाओं पर इस सदी के अंत तक लुप्त हो जाने का खतरा मंडरा रहा है। ऐसी स्थिति में हर संवेनदनशील व्यक्ति का यह कत्र्तव्य है कि वह अपनी मातृभाषा को बचाने का दायित्व निर्वहन करे। यूनेस्को ने भी 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के लिए चुना।
    21 फरवरी 1952 को तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के ढाका शहर मंे राजनीतिक दुराग्रह के कारण युवाओं को पुलिस दमन का शिकार होना पड़ा। दरअसल, पाकिस्तान बनने के पहले से ही यह सवाल हवा में तैरने लगा था कि पाकिस्तान की राष्ट्रभाषा क्या होगी? पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत खान ने उर्दु को पाकिस्तान की राष्ट्रभाषा घोषित कर दिया। पूर्वी पाकिस्तान के बांग्लादेशी लोगों ने इसे अपने अस्तित्व की अनदेखी मानते हुए प्रतिक्रिया में बांग्ला को राजभाषा बनाने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया। 21 फरवरी, 1952 को ढाका में नव आंदोलनकारी जनपथ पर आए तो पुलिस फायरिंग में कई लोग मारे गए। इसीलिए यूनेस्को ने 17 नवम्बर 1999 को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के लिए 21 फरवरी का दिन ही चुना। बांग्लादेश में तो इस दिवस को भाषा शहीद दिवस के रूप में पहले से ही मनाया जाता है।
    मातृभाषा अर्थात् वह भाषा जिसे अपने परिवेश में सुनते और बोलते हुए एक बच्चा बड़ा होता है। मातृभाषा दिवस हम सबको एक मौका देता है कि हम अपनी-अपनी मातृभाषा की ताकत को पहचाने, कन्हैया लाल सेठियाा का निम्न दोहा मातृभाषा के महत्व को दर्शाता है-

मायड़ भासा बोलताँ जिणनै आवे लाज,
अश्या कपूताँ सूँ दुखी, सगलो देस समाज।
    महाविद्यालय की छात्राओं में मातृभाषा के प्रति प्रेम जगाने व उन्हें जागरूक करने के उद्देश्य से 21 फरवरी 2017 को दी आई आई एस विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से अंर्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में अनेक गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर छात्राओं के लिए स्वचरित कविताएँ, लेख, स्लोगन एवं पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन रखा गया जिसमंे छात्राओं ने बढ-चढकर हिस्सा लिया। विविध प्रतियोगिताओं की विजेता छात्राओं को प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार स्वरूप प्रमाण पत्र व पुस्तकें प्रदान की र्गइं। विश्वविद्यालय की नाटक मंडली ने मातृभाषा की महत्ता को समझाते हुए एक नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति भी दी। इस नाटक के माध्यम से दर्शकों को यह समझाया गया कि जब जापानी, चीनी लोग अपनी मातृभाषाओं को बोलने में गर्व महसूस करते हैं तो हम भारतीय अपनी मातृभाषा में बात करने से क्यों कतराते हैं। नाटक में बताया गया कि हर अंग्रेजी बोलने वाला समझदार नहीं होता और अपनी मातृभाषा में बात करने वाला अनपढ़ नहीं होता।


 नुक्कड़ नाटक